शिवसेना की अपील, इसके बाद ना बढ़े रेल

मुंबई। सरकार की सहयोगी शिवसेना ने बजट पूर्व रेल किराये और मालभाड़े में वृद्धि को स्वीकार तो लिया है, लेकिन उसने सरकार से आग्रह किया है कि यह वृद्धि अंतिम होनी चाहिए। पार्टी के मुख-पत्र ‘सामना’ के संपादकीय में रेल किराया वृद्धि पर बेबाकी से राय जाहिर की गई है और कहा गया है कि राजग के प्रमुख घटक भारतीय जनता पार्टी ने विपक्षी दलों के हाथों में हथियार सौंप दिए हैं।गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने बजट पूर्व यात्री किराये और मालभाड़े में 14.2 फीसदी की वृद्धि की है जिसका असर मुंबईवासियों पर भी पड़ेगा, जिन्हें मासिक व त्रैमासिक टिकट पर दोगुना से ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा। रेलवे ने हालांकि, किराया वृद्धि को जायज ठहराते हुए कहा है कि देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक उद्यम 28,000 करोड़ रुपये प्रति साल घाटा सह रहा है और इसकी पूर्ति किराये में वृद्धि से की जा सकती है।संपादकीय में कहा गया है कि सरकार कहती है कि यह कदम सुरक्षित व आरामदायक यात्रा की सुविधा देने के लिए उठाया गया है, लेकिन जनता और विपक्षी दल सरकार के इस तर्क से सहमत नहीं हैं। संपादकीय के अनुसार, यूरोप, रूस और अमेरिका जैसे विकसित देशों की रेल व्यवस्था की तुलना में हमारी रेल ‘खतरा गाड़ी’ है। हमारे रेलवे स्टेशन, रेलवे पटरी सिग्नल खतरनाक अवस्था में हैं। भीड़ बढ़ गई है, लेकिन नए मार्ग नहीं बने हैं और जो ब्रिटिश बना कर गए हैं, हम उस पर भार बढ़ा रहे हैं।संपादकीय में कहा गया है कि गत 15-20 सालों में रेल मंत्रियों ने रेल विभाग को सिर्फ लूटा है। कांग्रेस के पी.के.बंसल के रिश्तेदार रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए और सिर्फ कमीशन के लिए रेल के बड़े ठेके दे दिए गए। संपादकीय के मुताबिक, इस वजह से दुर्घटनाएं हो रही हैं। लोग मर रहे हैं, लेकिन हर रेल बजट ने, शासकों ने जनता को सपने दिखाए हैं। लोग सुविधाएं चाहते हैं और इसके लिए पैसा देने को तैयार हैं – यह पैसा नेताओं के विकास के लिए नहीं है। इस किराया वृद्धि से जो जनता बेजार महसूस कर रही है, अब हिसाब मांगेगी।शिवसेना ने कहा कि अगर यह किराया वृद्धि कांग्रेस ने की होती तो, विपक्ष आलोचनाओं और अपशब्दों की बौछार कर देता। अब जब वही विपक्ष बहुमत के साथ सत्ता में है, उसे इस पर आत्मविश्लेषण करना चाहिए और रेलवे के सुधार की दिशा में काम करना चाहिए।

Source: राजनीति

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